प्रयागराज, इंडिया
त्रिनाया चुपचाप स्वरांश की आंखों में देख रही थी। उसके दिमाग में स्वरांश की वही बात घूम रही थी कि "सांस रुक जाती मेरी।" स्वरांश ने एक बार फिर से झटके से त्रिनाया को अपने सीने से लगा लिया। त्रिनाया ने हल्के से अपनी आंखें बंद की।

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