
प्रयागराज, इंडिया
त्रिनाया ने अपनी गाड़ी सीधे अपने न्यूज़ हाउस के बाहर रोकी। वो बस अपनी गाड़ी में बैठी हुई थी। उसके दिल की धड़कन इस वक्त बुरी तरीके से शोर कर रही थी। वो खुद से ही बोली, “नहीं त्रिनाया, इतना परेशान नहीं होते। इतनी कोई बड़ी बात नहीं है।”

Show your support








Write a comment ...