
शिमला, बजाज हाउस
इश्विका वैसे के वैसे ही आद्रांश के सामने खड़ी थी और आद्रांश की नजर उसके ऊपर टिकी हुई थी। वो उसे ऊपर से नीचे तक बहुत अच्छे से देख रहा था, तभी इश्विका अचानक से बोली, "ऐसे देखने की जरूरत नहीं है।"


शिमला, बजाज हाउस
इश्विका वैसे के वैसे ही आद्रांश के सामने खड़ी थी और आद्रांश की नजर उसके ऊपर टिकी हुई थी। वो उसे ऊपर से नीचे तक बहुत अच्छे से देख रहा था, तभी इश्विका अचानक से बोली, "ऐसे देखने की जरूरत नहीं है।"

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