
दिल्ली, इंडिया
स्वरांश वैसे के वैसे बेड पर बैठा हुआ था। त्रियांश उसकी गोद में था और वो चुपचाप उसे देख रहा था, जैसे मानो स्वरांश को पहचानता ही ना हो।

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स्वरांश वैसे के वैसे बेड पर बैठा हुआ था। त्रियांश उसकी गोद में था और वो चुपचाप उसे देख रहा था, जैसे मानो स्वरांश को पहचानता ही ना हो।

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