
दुबई, रात का वक्त
आद्रांश अभी भी वैसे के वैसे ही खड़ा था। उसकी नजर सामने टिकी हुई थी। एक पल के लिए मानो उसके शरीर से उसकी आत्मा निकल चुकी थी।

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दुबई, रात का वक्त
आद्रांश अभी भी वैसे के वैसे ही खड़ा था। उसकी नजर सामने टिकी हुई थी। एक पल के लिए मानो उसके शरीर से उसकी आत्मा निकल चुकी थी।

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