
रूस, मॉस्को
काश्वि इस वक्त कई सारी गाड़ियों के सामने खड़ी थी। उसके सामने न जाने कितनी सारी गाड़ियां खड़ी थीं, वो तो गिन भी नहीं रही थी। वो चुपचाप खड़ी वैसे के वैसे ही सामने देख रही थी। दिल की धड़कन बुरी तरीके से शोर कर रही थी। उसने कभी भी इंडिया से बाहर जाने के बारे में नहीं सोचा था, इन फैक्ट वो कभी गई नहीं थी।













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