
दुबई, रात का वक्त
इश्विका वैसे के वैसे दरवाजे के पास खड़ी थी। उसका दिमाग चल रहा था, बहुत जोरों से चल रहा था, लेकिन फिर भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर एक्जेक्टली करना क्या था। ज्योति उसके पास ही खड़ी थी।

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दुबई, रात का वक्त
इश्विका वैसे के वैसे दरवाजे के पास खड़ी थी। उसका दिमाग चल रहा था, बहुत जोरों से चल रहा था, लेकिन फिर भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर एक्जेक्टली करना क्या था। ज्योति उसके पास ही खड़ी थी।

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