
देहरादून, इंडिया
पैर फिसलने के चक्कर में सिद्या एकदम से पीछे की तरफ गिरने लगी और उसने चिल्लाते हुए अपनी आंखें बंद कर ली थीं, तभी किसी ने एकदम से उसकी कलाई पकड़ कर उसे लिटरली गिरने से बचाया हुआ था। सिद्या ने तुरंत अपनी आंखें खोलीं; उसके सामने अथर्व था, जिसकी नजर इस वक्त उसके चेहरे पर ही टिकी हुई थी। शशांक, जो वहीं साइड में खड़ा था, उसका दिमाग एक पल के लिए काम करना बंद कर चुका था।














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