
लंदन, रात का वक्त
रात के करीब 3:00 तक सर्जरी कंप्लीट हो चुकी थी शायद, क्योंकि ऑपरेशन थिएटर की लाइट साफ हो चुकी थी। कृधांश वही बेंच पर बैठा हुआ था। उसने एक बार अपनी नजर उठाते हुए लाल आंखों से ऑपरेशन थिएटर के गेट की तरफ देखा, जो धीरे-धीरे खुल रहा था। वो अपनी जगह से नहीं उठा था, उसने कसकर अपने हाथों की मुट्ठी बना रखी थी जैसे मानो वो खुद को संभाल रहा था, खुद को एक जगह शांत रखने की कोशिश कर रहा था।















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