
दिल्ली, इंडिया
रुद्रिका बेड पर बैठी हुई चुपचाप त्रियांश को देख रही थी, जो खुद उसके सामने बैठा हुआ था। वो दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे। त्रियांश कुछ कहता कि तभी रुद्रिका फिर से बोली, "तुम होगे बाहर जाकर पॉलिटिशियन, लेकिन घर पर तुम वो त्रियांश चौधरी हो, इसके बारे में मैं अच्छे से समझने लगी हूं। तुमने मुझे तब पागल बनाया था जब मैं तुम्हें जानती नहीं थी, लेकिन अब मुझे पागल बना नहीं सकते। तो क्या छुपा रहे हो तुम मुझसे, मिस्टर चौधरी?"















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