
भोपाल इंडिया
रुहान्या के पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे। वो बस अपने सामने खड़े पृथ्वी को देख रही थी, जिनके होठों पर इस वक्त एक तिरछी मुस्कुराहट थी, जैसे उसने पता नहीं कौन सी बहुत बड़ी जंग जीत ली है। रुहान्या ने एकदम से मुड़कर मीनल की तरफ देखा।


भोपाल इंडिया
रुहान्या के पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे। वो बस अपने सामने खड़े पृथ्वी को देख रही थी, जिनके होठों पर इस वक्त एक तिरछी मुस्कुराहट थी, जैसे उसने पता नहीं कौन सी बहुत बड़ी जंग जीत ली है। रुहान्या ने एकदम से मुड़कर मीनल की तरफ देखा।

Write a comment ...
Write a comment ...