
मुंबई इंडिया
प्रार्थना चुपचाप शौर्यांश और नियति की तरफ देख रही थी। उसने एक बार नियति के हाथ की तरफ देखा, जो कि शौर्यांश के बाहों में था। उसने कसकर शौर्यांश को पकड़ा हुआ था।


मुंबई इंडिया
प्रार्थना चुपचाप शौर्यांश और नियति की तरफ देख रही थी। उसने एक बार नियति के हाथ की तरफ देखा, जो कि शौर्यांश के बाहों में था। उसने कसकर शौर्यांश को पकड़ा हुआ था।

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