
मुंबई इंडिया
शौर्यांश वैसे के वैसे ही खड़ा था। उसने एक बार सर झुकाकर प्रार्थना की तरफ देखा, अगली पल उसने उसके ऊपर तुरंत अपनी पकड़ मजबूत कर दी कि क्या पता फिर से उसे दूर भगाने की कोशिश करे। गोलगप्पा वाला, वो तो कन्फ्यूजन से उन दोनों को देखने लगा, लेकिन उसके बीच में बोलने की कोई कोशिश नहीं की।




















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